शादी-ब्याह के मौके पर गाए जाने वाले लोकगीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं गाए जाते, बल्कि इनके पीछे सदियों पुरानी परंपराएं भी छिपी होती हैं। ऐसा ही एक गीत है हल्दी लगाओ रे, तेल चढ़ाओ रे…। ये गीत मध्य प्रदेश की शादियों में हल्दी की रस्म में बड़े उल्लास के साथ गाया जाता है।
ये गीत लड़की की शादी में खासतौर से गाया जाता है, जिसमें इस रस्म को बहुत ही खूबसूरती के साथ बयां किया जाता है। आइए जानें क्या कहता है ये लोकगीत। हल्दी-तेल की रस्म शादी में हल्दी और तेल चढ़ाने की रस्म का खास महत्व होता है। हल्दी को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं, हल्दी और तेल से बना उबटन त्वचा के निखारने के लिए भी इस्तेमाल होता है। शादी में दुल्हन को हल्दी और तेल लगाया जाता है, ताकि उसका वैवाहिक जीवन खुशियों और समृद्धि से भरा रहे। साथ ही, दुल्हन का रूप भी निखरकर आए
इस लोकगीत में दुल्हन की खूबसूरती को कई तरीकों से बयां किया गया है। दुल्हन के चेहरे की चमक को बयां करने के लिए उसे चांद का टुकड़ा कहा गया है। उसके चेहरे की कोमलता को बयां करने के लिए उसकी तुलना फूलों से की गई है। वहीं इस गाने में आगे कहा जाता है मुखड़ा सजाओ रे, कंचन बनाओ रे… यानी दुल्हन को हल्दी-तेल लगाओ, ताकि वह सोने की तरह चमकने लगे। ये गीत बहुत ही भावुक करने वाला है, लेकिन वहीं पूरे माहौल को ऊर्जा से भी भर देता है। इसकी धुन इतनी प्यारी है कि हल्दी की रस्म का पूरा माहौल एनर्जी से भर जाता है। इतना ही नहीं, इस गीत को शुभता के प्रतीक के रूप में भी गाया जाता है। ढोलक की थाप पर ये गाना काफी मजेदार लगता है।


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