मध्य-पूर्व में हाल में लंबे समय से थमी जंग एक बार फिर शुरू हो सकती है। इज़रायली मीडिया के अनुसार, इज़रायल की नेतन्याहू सरकार ईरान पर एक और हमला करने की तैयारी कर रही है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव का कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़रायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने कहा है कि तेल अवीव अमेरिका और ईरान के बीच हुए किसी भी समझौते से बंधा हुआ महसूस नहीं करेगा और ईरान पर हमले करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल अब ईरान के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की प्लानिंग कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक सैन्य विकल्पों के खत्म होने और कूटनीतिक प्रयासों के विफल होने के संकेतों के बीच, अब इज़रायल और ईरान दोनों ही देश एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बता दें कि ईरान पहले ही खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस सुविधाओं पर हमला करने की अपनी क्षमता दिखा चुका है।

इससे यह चिंता भी बढ़ गई है कि इजरायल का कोई भी एकतरफा हमला ईरान की ओर से व्यापक जवाबी कार्रवाई को भड़का सकता है, जिसमें पूरे क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच फिर से जंग शुरू हुई तो इज़रायल की ऊर्जा संपत्तियां भी ईरान के सीधे हमलों की चपेट में आ सकती हैं, जिससे किसी भी नए संघर्ष का असर सैन्य लक्ष्यों से कहीं आगे तक फैल सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एक तरफ इजरायल जहां ईरान संग तनाव बढ़ाने के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका इस तनाव से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहा है। इसलिए, मिसाइलों के नए दौर से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर टकराव के केंद्र में आ सकता है, और हमले सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर महत्वपूर्ण ऊर्जा सुविधाओं तक फैल सकते हैं। तनाव में ऐसी बढ़ोतरी क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकती है और वैश्विक तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी का दबाव बना सकती है, जिससे इस संघर्ष में एक आर्थिक पहलू भी जुड़ जाएगा।


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