उज्जैन :पंचांग की गणना के अनुसार इस बार श्रावणी पूर्णिमा रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें अपने भाई की कलाई पर दिनभर राखी बांध सकेगी।
मोक्षदायिनी शिप्रा पर सुबह से श्रावणी उपाकर्म होगा। ब्राह्मण वैदिक रीति से नई यज्ञोपवीत धारण करेंगे। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में तड़के 4 बजे भस्म आरती में भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया श्रावणी पूर्णिमा पर 28 अगस्त को शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, बव उपरांत कौलव करण तथा मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी में मनाया जाएगा। धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार बहनें भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधेंगी। शुक्रवार के दिन सुकर्मा योग होने से भी यह दिन विशेष शुभ फलदायी माना जा रहा है। पं.डब्बावाला ने बताया इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा। पंचांग की गणना के अनुसार 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट से भद्रा शुरू होगी, जो रात 9 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। यही कारण है कि 28 अगस्त को सुबह सूर्योदय से ही रक्षाबंधन पर्व मनाने का क्रम शुरू किया जा सकेगा। दिनभर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी और प्रदोष काल तक पर्व मनाने का अवसर रहेगा।इस बार रक्षाबंधन को लेकर खास बात यह है कि पर्व मनाने के लिए दिन में अलग-अलग अवसर उपलब्ध रहेंगे। सुबह ब्राह्मण शिप्रा तट पर श्रावणी उपक्रम कर सकेंगे, इसके बाद परिवारों में रक्षासूत्र बांधने का क्रम शुरू होगा और प्रदोष काल में भी राखी बांधी जा सकेगी। इस तरह पर्व का धार्मिक और पारिवारिक क्रम अपनी परंपरा के अनुसार पूरे दिन चलता रहेगा।
शास्त्रीय अभिमत के अनुसार मध्याह्न काल के आसपास रक्षा सूत्र बांधना श्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा प्रदोष काल के आसपास भी रक्षाबंधन मनाने का विधान कई परिवारों में प्रचलित है। कुछ परिवार निशाकाल में भी अपनी कुल परंपरा के अनुसार पर्व मनाते हैं। इसलिए इस बार भद्रा का व्यवधान नहीं होने से परिवार अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार रक्षाबंधन का समय निर्धारित कर सकेंगे।


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