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Sun, Sep 6, 2026
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कांग्रेस के दिग्गज नेता ने कहा जब भी चीनी की कीमतें बढ़ी, तब सरकारें गिरीं’

ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई ई-20 योजना के नफे नुकसान को लेकर देशभर में चर्चा है। गाड़ियों की क्षमता और माइलेज पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन इस तकनीकी और नीतिगत…

कांग्रेस के दिग्गज नेता ने कहा जब भी चीनी की कीमतें बढ़ी, तब सरकारें गिरीं’

ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई ई-20 योजना के नफे नुकसान को लेकर देशभर में चर्चा है। गाड़ियों की क्षमता और माइलेज पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन इस तकनीकी और नीतिगत चर्चा के बीच बड़ा सवाल ये है कि इस पूरे खेल में मोटा पैसा कौन छाप रहा है? इथेनॉल और चीनी के बढ़े हुए दाम पर कांग्रेस के बड़े नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इथेनॉल सेक्टर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण एक ही महीने मेंचीनी की कीमतें 25 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ गई हैं।

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि 'खा गई चीनी, पी गई तेल, देखो यह है बीजेपी का खेल'। बीजेपी जीडीपी खा गई। आम जनता रो रही है वहीं बीजेपी हंस रही है। बीजेपी को शरम नहीं आती है, एक माह में चीनी के दामों में 25 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। क्योंकि इथेनॉल में भयंकर करप्शन हो रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी दोनों हाथों से लूट रहे थे। आज कह रहे हैं कि मेरा इससे कुछ लेना नहीं है। 

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास आगे कहा कि इथेनॉल सेक्टर में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के कारण एक ही महीने में चीनी की कीमतें 25 रुपए प्रति किलोग्राम बढ़ गई हैं। इथेनॉल के मामले में पूरी BJP ही भ्रष्ट है। वे इससे पैसा कमा रहे हैं और अब उन्होंने चीनी के मामले में देश को बर्बाद कर दिया है। लोग चीनी के लिए परेशान हैं। प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा लेकिन मेरी बात याद रखिएगा। जब भी चीनी की कीमतें बहुत ज़्यादा बढ़ी हैं, सरकारें गिरी हैं। BJP के पतन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। चीनी की कीमतें बढ़ गई हैं और चीनी का यही मुद्दा BJP के पतन का कारण बनेगा।

मौजूदा वक्त में चीनी की कीमतें सिर्फ एक महीने में 25 फीसदी उछलकर 60 रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि चीनी में तेजी का एथेनॉल से कोई संबंध नहीं है। बाजार के जानकार बताते हैं कि एथेनॉल की बढ़ती मांग का असर मक्का जैसी दूसरी फसलों और उनसे जुड़े खाद्य पदार्थों पर भी पड़ रहा है।

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