काठमांडू। नेपाल और तिब्बत सीमा से सटी त्रिशुली और भोटे कोशी नदियों में आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है, जहां त्रिशुली नदी का जलस्तर महज 30 मिनट के भीतर 30 फीट तक बढ़ गया। नदी के विकराल रूप धारण करते ही ऊपरी बेसिन में स्थित स्वचालित निगरानी स्टेशन अचानक सिग्नल देना बंद कर बह गए, जिसके कारण लोगों को समय पर अलर्ट नहीं मिल सका।

खतरे को भांपते हुए निवासियों ने शोर मचाकर (चीखते हुए) और सीटियां बजाकर एक-दूसरे को सतर्क किया और आनन-फानन में नदी के किनारे से ऊंचे स्थानों की ओर भागकर अपनी जान बचाई। अंतर्राष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) के अनुसार, गलछी में त्रिशुली नदी का जलस्तर 30 मिनट के भीतर नौ मीटर (लगभग 30 फीट) तक बढ़ गया, जबकि मालेखु में इसी अवधि में सात मीटर की वृद्धि दर्ज की गई। बाढ़ की तेज बहाव में निगराती केंद्र बह गए।नेपाल की चेतावनी प्रणाली ने अधिकारियों को बाढ़ की सूचना मिलते ही अलर्ट भेजना शुरू कर दिया था, लेकिन ऊपरी बेसिन नेटवर्क अग्रिम सूचना देने में विफल रहा।
बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के वरिष्ठ संभागीय जलविज्ञानी विनोद पराजुली के अनुसार, ऊपरी भोटे कोशी में स्थापित स्वचालित स्टेशनों ने अधिकारियों को अलर्ट भेजने से पहले ही सिग्नल देना बंद कर दिया था। उन्होंने बताया, "कोई भी स्टेशन हमें समय पर अलर्ट नहीं भेज सका।" हालांकि, इसके बाद रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन के तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों को 6 लाख से अधिक एसएमएस (SMS) अलर्ट भेजे गए।
अधिकारियों का कहना है कि इन चेतावनियों से निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित निकलने में काफी मदद मिली, लेकिन कुछ स्थानों पर निवासियों को अपने प्रत्यक्ष अनुभव पर ही निर्भर रहना पड़ा। विनोद पराजुली ने चेतावनी प्रणाली के असमान परिणामों को स्वीकार करते हुए कहा, "हम रसुवा में सतर्क करने में विफल रहे, लेकिन नुवाकोट और निचले क्षेत्रों में समय पर चेतावनी भेजने से संभवतः सैकड़ों लोगों की जान बच सकी।"


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