भोपाल। प्रदेश में बिजली आउटसोर्स व्यवस्था खत्म कर पंजाब की तर्ज पर नई आउटसोर्स सुधार संविदा नीति लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर बिजली आउटसोर्स कर्मचारी आंदोलन की तैयारी में हैं। मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों के करीब 45 हजार बिजली आउटसोर्स ठेका कर्मचारी 7 और 8 नवंबर 2026 को काम बंद आंदोलन करेंगे। इसका ऐलान मप्र बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने किया है।

भार्गव ने कहा कि भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव के वचन-पत्र में आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी बनाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हुआ। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें केंद्र के आउटसोर्स कर्मियों के समान न्यूनतम वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब में बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को संविदा कर्मचारी बनाने के लिए विधानसभा से विधेयक पारित हो चुका है, जबकि मप्र में इस दिशा में पहल नहीं हुई है। वहीं, बिजली कंपनियों के नए संगठनात्मक ढांचे में करीब 23 हजार पद खत्म किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों को भविष्य में छंटनी और बेरोजगारी का डर है।
संगठन का आरोप है कि बोनस की दर बढ़ाने के आदेश के बावजूद 69 महीने से पुरानी दर से भुगतान हो रहा है। इससे प्रत्येक कर्मचारी को करीब 80 से 90 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। कर्मचारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर धनतेरस की रात से दीपावली की मध्यरात्रि तक सामूहिक अवकाश लेने की चेतावनी दी है।


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