कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
ने दलितों, पिछड़े समुदायों और अल्पसंख्यकों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण की मांग की है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय तभी सुनिश्चित हो सकता है जब अलग-अलग समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले।

सिद्धारमैया ने कर्नाटक में कराए गए जातीय सर्वे की रिपोर्ट को लागू करने और उसे सार्वजनिक करने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पिछड़े समुदायों की आबादी के बारे में भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सामाजिक न्याय की नीतियां बनाने के लिए जातीय सर्वे जरूरी है। उन्होंने बताया कि 2013 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस सर्वे का आदेश दिया था। हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान यह पूरा नहीं हो सका। बाद में उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष मधुसूदन नाइक की अगुवाई वाली रिपोर्ट को स्वीकार किया। सिद्धारमैया के मुताबिक, फिलहाल अदालत के आदेश के कारण इस रिपोर्ट को लागू या सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
लोकसभा और विधानसभा में भी मांगा प्रतिनिधित्व
सिद्धारमैया ने लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में भी इसी तरह के प्रतिनिधित्व की मांग की। उनका कहना है कि समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बिना बराबरी वाला समाज बनाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि आरक्षण और प्रतिनिधित्व का आधार अलग-अलग समुदायों की आबादी होनी चाहिए। इससे सभी वर्गों को उनका उचित हिस्सा मिल सकेगा।


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