बिलासपुर | जिस पोते को बुजुर्ग ने अपने बुढ़ापे का सहारा समझकर बैंक खाते और एफडी में नामिनी बनाया था, आज उसी पर उनकी जीवनभर की कमाई हड़पने का आरोप है। 85 वर्षीय उमाशंकर दुबे इन दिनों न्याय की तलाश में शहर की सड़कों पर पर्चे बांटने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि बैंक में जमा लाखों रुपये और पेंशन राशि गायब होने के बाद वे पाई-पाई के मोहताज हो गए हैं।
न्याय नहीं मिलने से आहत बुजुर्ग अब अपनी पीड़ा जनता तक पहुंचाकर मदद की गुहार लगा रहे हैं।उमाशंकर दुबे का पंजाब नेशनल बैंक में पिछले करीब 20 वर्षों से खाता संचालित है। उनके अनुसार बैंक में पांच लाख रुपये की फिक्स डिपाजिट थी, जिसमें पोता प्रशांत दुबे नामिनी था।बचत खाते में भी करीब दो लाख रुपये और दिसंबर माह की 25 हजार रुपये की पेंशन राशि जमा थी। बुजुर्ग का कहना है कि पोते ने बैंक के शाखा प्रबंधक और एक पूर्व फौजी रिटायर कैशियर की मिलीभगत से कुल 7.25 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित के मुताबिक जब वे अपनी पेंशन और खाते की जानकारी लेने बैंक पहुंचे तो टालमटोल किया गया। बाद में जानकारी मिली कि पेंशन का भुगतान दर्शाया जा चुका है। हिसाब मांगा तो उनसे अभद्रता की गई और बैंक से बाहर निकाल दिया गया।

अपनी जमा पूंजी वापस पाने बुजुर्ग लाठी टेकते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। एसडीएम, एसपी और आइजी कार्यालय में भी लिखित शिकायत दी है। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव में उन्हें न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, लेकिन अब तक राहत नहीं मिली है। निराशा के बीच उमाशंकर दुबे ने अपनी लड़ाई को सार्वजनिक करने का फैसला लिया है। वे शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर पर्चे बांटकर लोगों को अपनी आपबीती बता रहे हैं। पर्चों में उन्होंने पूरे मामले का उल्लेख करते हुए नागरिकों से ऐसे मामलों में सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही वरिष्ठ नागरिक संरक्षण नियमों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग की है।


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